बिहार भारत के प्रमुख मक्का उत्पादक राज्यों में शामिल हो गया है। कटिहार, पूर्णिया, बेगूसराय और अररिया जैसे जिले मक्का की खेती में सबसे आगे हैं। अररिया जिले में सबसे अधिक मक्का उपज रिकॉर्ड की गई है।
पिछले कुछ वर्षों में बिहार ने मक्का उत्पादन के मामले में वाकई में बड़ा उछाल लिया है।आंकड़े दिखाते हैं कि उत्पादन, उपज और बुवाई क्षेत्र में मक्का की खेती लगातार बढ़ रही है।
बिहार में मक्का की खेती: रबी और गर्मी का मेला
- रबी मक्का में उत्पादन और उपज में सकारात्मक वृद्धि रही है।
- मक्का वैल्यू चेन (Maize Value Chain)
मक्का उत्पादन में तीन मुख्य चरण हैं:
- प्रोडक्शन से पहले (Pre-Production Stage)
- भूमि तैयारी, बीज की बुवाई, उर्वरक और खाद का उपयोग, पौध संरक्षण
- किसान आर्थिक स्थिति के अनुसार ट्रैक्टर या पशु से जुताई करते हैं
- DAP, यूरिया, पोटाश और जैविक खाद का उपयोग सामान्य है
- उत्पादन और कटाई (Production & Harvesting Stage)
- बिहार में मक्का की खेती की लागत लगभग ₹50000 to ₹60000 प्रति हेक्टेयर है
उत्पादन लागत:
- ₹1,500 प्रति क्विंटल, उपज: 40 approx. क्विंटल/हेक्टेयर
- किसानों की बिक्री चैनल: मंडी, रेलवे कमिशन एजेंट्स, बीआरएलपीएस
- बुवाई और बीज चयन (Seed & Hybrid Development)
- रबी मौसम में हाइब्रिड बीज की अधिक मांग
- खरीफ मौसम में खुले पोलिनेटेड वेराइटीज़ (OPV) पसंद
- ICAR और कृषि विश्वविद्यालयों ने नए बीज विकसित किए
- बिहार में मक्का की संभावनाएँ
- मक्का उत्पादन परिदृश्य: 50 क्विंटल/एकड़ (विश्वस्तरीय उपज)
- पशु चारा उद्योग, कॉर्न स्टार्च फैक्ट्रियाँ, दक्षिण-पूर्व एशिया और लैटिन अमेरिका में निर्यात
- 1.3 मिलियन छोटे और सीमांत किसानों के लिए रोजगार और आय का स्रोत
- Ethanol उत्पादन क्षमता बढ़ने से मांग और भी तेज़
निष्कर्ष
- बिहार की मक्का खेती ने केवल किसानों की आय बढ़ाई है बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था में भी योगदान दिया है।
- आधुनिक कृषि तकनीक अपनाकर किसान कम जोखिम और ज्यादा लाभ कमा रहे हैं।
- सरकार और संस्थाओं के सहयोग से मक्का उद्योग और वैल्यू चेन मजबूत हो रहा है।
- मक्का की खेती बिहार के किसानों के लिए गरीबी कम करने और आर्थिक सशक्तिकरण का नया रास्ता खोल रही है।
- बिहार के किसान अब मक्का की खेती से दोहरी आमदनी पा रहे हैं और राज्य धीरे-धीरे मक्का हब ऑफ इंडिया बनता जा रहा है।






