क्यों ज़रूरी है पूर्णिया एयरपोर्ट?
सीमांचल और कोसी इलाके के लोग अब तक बागडोगरा, दरभंगा या पटना जाकर ही फ्लाइट पकड़ते थे। हर जगह अलग दिक्कत – कहीं दूरी, कहीं महँगा किराया और कहीं सुरक्षा। अब चूनापुर एयरबेस पर बन रहा पूर्णिया एयरपोर्ट शुरू होगा और यह पूरे इलाके की तस्वीर बदल देगा।
मेरी कहानी – एक ट्रैवल व्लॉगर की मुश्किलें
मैं पूर्णिया यूनिवर्सिटी के पास अपना किकी स्टूडियो चलाती हूँ और भारत के अलग-अलग हिस्सों की व्लॉगिंग करती हूँ। लेकिन हर बार सफर की असली परेशानी यही थी – एयरपोर्ट तक पहुँचने का संघर्ष।
बागडोगरा एयरपोर्ट – सबसे पास, लेकिन फिर भी दूर
दूरी: 4 घंटे बस से
किराया: ₹300
फ्लाइट्स: दिन में 3 (सुबह 10:30 से शाम 4:20 तक)
समस्या:
सुबह की फ्लाइट के लिए रात 3–4 बजे घर से निकलना पड़ता है। एक लड़की होकर इतनी सुबह निकलना सुरक्षित नहीं। मानसून में किराया ठीक (₹5000) मिलता है, लेकिन बाकी समय में अक्सर ₹10,000+।
- दरभंगा एयरपोर्ट – भरोसेमंद नहीं
बस कनेक्टिविटी खराब
ट्रेन (जानकी एक्सप्रेस) आधी रात को निकलती है
सर्दियों में फ्लाइट अक्सर कैंसिल
समस्या: कई बार मुझे खाली हाथ घर लौटना पड़ा या फिर कहीं और से महँगा टिकट लेना पड़ा। - पटना एयरपोर्ट – महँगा और भीड़भाड़ वाला
दूरी: 8 घंटे से ज़्यादा
किराया: हमेशा ज़्यादा
मुंबई/दिल्ली के टिकट: महँगे और जल्दी फुल
- चूनापुर एयरपोर्ट क्यों बदलेगा तस्वीर
- बिहार की सबसे लंबी रनवे (2800 मीटर)
- नया टर्मिनल (₹33.99 करोड़ की लागत से बन रहा है)
- सीमांचल के 7 जिलों + नेपाल और उत्तर बंगाल को फायदा
- छात्रों, मरीजों और नौकरीपेशा लोगों के लिए राहत
- महिलाओं के लिए सबसे बड़ी राहत
- मेरे जैसी सोलो ट्रैवलर लड़कियों के लिए यह एयरपोर्ट वरदान है। अब मुझे:
- आधी रात को घर से नहीं निकलना होगा।
- टिकट पर ज़्यादा खर्च नहीं करना पड़ेगा।
- बिना टेंशन के सफर करना आसान होगा।
नतीजा: पूर्णिया से जुड़ेगी नई उम्मीद
मेरे लिए पूर्णिया एयरपोर्ट सिर्फ एक एयरपोर्ट नहीं, यह सपनों की उड़ान है। अब यात्रा आसान, सुरक्षित और सस्ती होगी।
धन्यवाद पूर्णिया एयरपोर्ट
– तुम सिर्फ शहर नहीं, ज़िंदगियों को जोड़ रहे हो।






