मिसियस की उस कामयाबी ने जैक को अंदर तक हिला दिया था।
जिस चीज़ को वह सालों से हासिल करने की कोशिश कर रहा था…
वह किसी और ने कर दिखाया था।
जैक की आँखों के सामने उसका पूरा प्रोजेक्ट जैसे बिखरता जा रहा था।
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई थी।
क्योंकि टेलीपोर्टेशन की नाकामी के साथ-साथ…
उसका दूसरा प्रोजेक्ट भी दम तोड़ रहा था।
**डार्क एनर्जी।**
जिससे उसे उम्मीद थी कि शायद ब्रह्मांड के सबसे बड़े रहस्यों में से किसी एक का जवाब मिल सकेगा…
वहाँ भी…
कोई रास्ता दिखाई नहीं दे रहा था।
चार साल।
चार साल उसने अपनी ज़िंदगी के सबसे कीमती साल…
एक ऐसे सपने के पीछे लगा दिए थे,
जिसका कोई अंत नज़र नहीं आ रहा था।
और तभी…
उसके दिमाग में एक और चेहरा आया।
**सामंथा।**
वह लड़की…
जिसके साथ जैक ने अपनी पूरी ज़िंदगी बिताने के सपने देखे थे।
सामंथा एक इकोनॉमिस्ट थी।
समझदार।
खूबसूरत।
और जैक को दिल से चाहने वाली।
लेकिन जैक की ज़िंदगी में…
साइंस हमेशा पहले आती थी।
हर बार।
जब सामंथा उसके साथ समय बिताना चाहती…
जैक के पास लैब का काम होता।
जब वह कहीं बाहर जाना चाहती…
जैक किसी प्रयोग में व्यस्त होता।
और जब उसे जैक की ज़रूरत होती…
जैक के पास हमेशा एक ही जवाब होता।
**“बस ये प्रयोग पूरा हो जाए...”**
लेकिन…
वो प्रयोग कभी पूरा नहीं हुआ।
और धीरे-धीरे…
सामंथा उससे दूर होती चली गई।
आखिरकार…
एक दिन उसने जैक को छोड़ दिया।
जैक ने उस वक्त भी खुद को समझाया था…
कि शायद ये ज़रूरी था।
कि बड़े वैज्ञानिक बनने के लिए…
कुछ चीज़ों का त्याग करना पड़ता है।
लेकिन आज…
उस खाली लैब में बैठकर…
उसे पहली बार महसूस हुआ…
कि उसने सिर्फ सामंथा को नहीं खोया था।
उसने खुद को भी खो दिया था।
चार साल पहले का जैक…
और आज का जैक…
दो बिल्कुल अलग इंसान थे।
उसकी सेहत बुरी तरह बिगड़ चुकी थी।
उसका वजन बढ़कर…
**एक सौ चालीस किलो** हो चुका था।
उसकी लंबाई करीब पाँच फीट आठ इंच थी।
आँखों के नीचे गहरे काले घेरे थे।
चेहरे पर थकान साफ दिखाई देती थी।
ब्लड प्रेशर बढ़ चुका था।
हाइपरटेंशन…
और हाई कोलेस्ट्रॉल…
अब उसकी ज़िंदगी का हिस्सा बन चुके थे।
डॉक्टरों ने उसे साफ शब्दों में चेतावनी दी थी।
उसे अपना वजन घटाकर…
लगभग **बहत्तर किलो** तक लाना था।
खाने-पीने पर नियंत्रण रखना था।
व्यायाम करना था।
अपनी ज़िंदगी बदलनी थी।
लेकिन जैक ने…
किसी की नहीं सुनी।
क्योंकि उसके लिए…
काम सबसे ऊपर था।
हर चीज़ से ऊपर।
यहाँ तक कि…
खुद से भी ऊपर।
लेकिन उस रात…
कुछ बदल गया।
जैक ने अपने सामने पड़े कागज़ों को देखा।
कंप्यूटर स्क्रीन को देखा।
उन प्रयोगों को देखा…
जिनमें उसकी ज़िंदगी के चार साल दफन थे।
और फिर…
उसने एक फैसला कर लिया।
**अब बहुत हो चुका था।**
उसे नहीं पता था कि आगे क्या होगा।
उसे ये भी नहीं पता था कि वह कभी वापस लैब में आएगा या नहीं।
लेकिन इतना तय था…
कि उसे रुकना होगा।
कम से कम…
एक साल के लिए।
उसे एक **सैबेटिकल** चाहिए था।
एक लंबा ब्रेक।
साइंस से…
लैब से…
और शायद…
खुद को फिर से खोजने के लिए।
जैक ने अपना लैपटॉप खोला।
एक नया ईमेल लिखा।
कुछ ही शब्द थे…
लेकिन उन शब्दों के पीछे…
चार साल की थकान थी।
उसने लैब को बताया कि उसे माफ़ करें।
और ये भी लिखा…
कि वह कम से कम एक साल के लिए काम से दूर रहना चाहता है।
फिर…
उसने ईमेल भेज दिया।
**Send.**
बस एक क्लिक।
और जैसे…
उस क्लिक के साथ…
उसकी पुरानी ज़िंदगी का एक अध्याय बंद हो गया।
जैक ने लैब में आखिरी बार चारों तरफ देखा।
वही मशीनें।
वही कंप्यूटर।
वही प्रयोग।
वही अधूरे सपने।
लेकिन आज…
इन सबके बीच…
उसे पहली बार आज़ादी महसूस हो रही थी।
वह उठा।
अपना कोट पहना।
और लैब से बाहर निकल गया।
बाहर…
बर्लिन की सड़कों पर बर्फ गिर रही थी।
क्रिसमस की रात थी।
शहर रोशनी से जगमगा रहा था।
लोग अपने परिवारों के साथ घरों में थे।
और जैक...
कई सालों बाद…
अकेला था।
लेकिन इस बार…
उसका अकेलापन उसे डर नहीं रहा था।
वह धीरे-धीरे सड़क पर चलने लगा।
तभी…
दूर किसी चर्च से घंटियों की आवाज़ सुनाई दी।
**टन… टन… टन…**
जैक कुछ पल के लिए रुक गया।
उसने ऊपर आसमान की तरफ देखा।
बर्फ के छोटे-छोटे टुकड़े उसके चेहरे पर गिर रहे थे।
और न जाने क्यों...
उसके अंदर एक अजीब-सी उम्मीद जागी।
शायद…
सब कुछ खत्म नहीं हुआ था।
शायद…
ज़िंदगी ने उसके लिए अभी कुछ बचाकर रखा था।
उसे नहीं पता था…
कि अगली सुबह क्या होगा।
उसे नहीं पता था…
कि उसका भविष्य किस दिशा में जाने वाला है।
लेकिन उस रात…
एक बात तय हो चुकी थी।
**जैक अब उस इंसान की तरह नहीं जीना चाहता था… जो सिर्फ अपने सपने के पीछे भागता है।**
वह घर की ओर बढ़ता गया।
पीछे छूट रही थी…
उसकी पुरानी ज़िंदगी।
और आगे…
उसके इंतज़ार में था…
एक ऐसा रास्ता…
जिसके बारे में जैक खुद भी कुछ नहीं जानता था।
**लेकिन क्या सच में टेलीपोर्टेशन का सपना खत्म हो चुका था?**
या…
कहीं किसी मोड़ पर…
उस अधूरे प्रयोग का जवाब…
अब भी उसका इंतज़ार कर रहा था?
**कहानी अभी बाकी थी…**
और असली रहस्य…
अब शुरू होने वाला था।








